Case of murder of two Indian fishermen, petition to close hearing against Italian Marines – दो भारतीय मछुआरों की हत्या का मामला, इटली के नाविकों के खिलाफ सुनवाई बंद करने की अर्जी

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Jul 3, 2020
दो भारतीय मछुआरों की हत्या का मामला, इटली के नाविकों के खिलाफ सुनवाई बंद करने की अर्जी

सुप्रीम कोर्ट.

नई दिल्ली:

केरल में इटली के मरीन द्वारा दो मछुआरों की हत्या के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करके मामले की सुनवाई को बंद करने का अनुरोध किया है. केंद्र सरकार ने अदालत से कहा है कि भारत ने UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के फैसले को मानने का फैसला किया है क्योंकि इसके बाद कोई अपील नहीं हो सकती और यह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता नियमों के मुताबिक बाध्यकारी है. लिहाजा अदालत इस मामले में लंबित सुनवाई को बंद कर दे. 

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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में सरकार को UNCLOS के फैसले को रिकॉर्ड पर रखने को कहा था. केंद्र सरकार ने उसके फैसले को दाखिल करते हुए कहा कि अदालत को केस का निपटारा कर देना चाहिए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही दोनों मरीन को शर्तों के आधार पर इटली जाने की इजाजत दी थी. 

दरअसल UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के ट्रिब्यूनल ने कहा है कि  UNCLOS के नियमों के तहत भारतीय अधिकारियों की कार्रवाई सही थी. इटालियन सैन्य अधिकारियों यानी इटली  UNCLOS Article 87(1)(a) और 90 के मुताबिक भारत के नेविगेशन के अधिकार को रोक रहा था. दोनों देशों भारत और इटली को इस घटना पर कार्रवाई का अधिकार था और कानूनी अधिकार भी कि इटालियन नाविकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करें. 

ट्रिब्यूनल ने इटली के दोनों नाविकों के हिरासत में रखने के लिए भारत से मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया. लेकिन ये माना कि इन नाविकों को देश के लिए काम करने के कारण भारतीय अदालतों की कार्यवाही से इम्युनिटी थी. लेकिन भारत को जान माल के नुकसान के लिए हर्जाना बनता है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत और इटली आपस में विचार कर र्जाने की रकम तय कर सकते हैं. 

ये मामला 2012 का है जब इटालियन नाविक सैलवाटोर गिरोन और मैसीमिलानो लैटोरे पर केरल के पास समुद्र में दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने का आरोप लगा. इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अधिकार क्षेत्र का था. इटली का कहना था कि ये घटना भारत की समुद्री सीमा के बाहर घटी लेकिन भारत ने इस पर सवाल उठाए. भारत ने ये भी कहा कि क्योंकि मारे गए मछुआरे भारतीय थे तो मामले को भारतीय कानूनों के तहत निबटाया जाए.


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