News Hindi: RSS collateral BMS will protest against Modi government reforms calling anti workers and laborers – निर्मला सीतारमण के फैसलों पर संघ परिवार में मतभेद, BMS ने कहा- सरकार सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारना चाहती है

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Jun 7, 2020
निर्मला सीतारमण के फैसलों पर संघ परिवार में मतभेद, BMS ने कहा- सरकार सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारना चाहती है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई आर्थिक सुधारों का ऐलान किया है.

नई दिल्ली :

संघ परिवार में अहम आर्थिक सुधार के मसले पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. आरएसएस के संगठन भारतीय मज़दूर संघ (BMS) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (PSUs) के निजीकरण और विनिवेश के बड़े ऐलान के खिलाफ देश भर में 10 जून को विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है. भारतीय मज़दूर संघ के नेता नाराज़ हैं कि मोदी सरकार ने श्रमिक संगठनों से बातचीत किये बगैर ही सरकारी उपक्रमों के निजीकरण और विनिवेश का बड़ा ऐलान कर दिया. उन्होंने मोदी सरकार की इस नीति को मज़दूरों के हितों के खिलाफ बताते हुए देश व्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है.  भारतीय मजदूर संघ के जोनल सेक्रेटरी ने एनडीटीवी से कहा, ‘हम पूरे देश में 10 जून से विरोध प्रदर्शन और धरना शुरू करने जा रहे हैं. मोदी सरकार सुधार के नाम पर मजदूर विरोधी फैसले कर रही है. ये रिफॉर्म पैकेज देश के हित के खिलाफ है. सरकार सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को ही मारना चाहती है’.

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मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय मज़दूर संघ के नेताओं ने तय किया है की वो देश में मोदी सरकार के खिलाफ ‘सेव पब्लिक सेक्टर, सेव इंडिया’ मुहिम शुरू करेंगे.  मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को बेचने का देश भर में विरोध शुरू होगा.  रेलवे और डिफेन्स आर्डिनेंस फैक्ट्रीज बोर्ड के कोर्पोरटिजशन का फैसला गलत है. कोयला सेक्टर का व्यवसायीकरण मज़दूर के हित में नहीं है. बीएमएस का मानना है कि डिफेन्स जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में  एफडीआई  गलत है.

भारतीय मज़दूर संघ के अलावा देश के 10 बड़े केंद्रीय श्रमिक संगठन भी लामबंद हो गए हैं और सरकार को घेरने की रणनीति  बनाने में जुट गए हैं.   सीटू  के महासचिव तपन सेन का कहना है कि मोदी सरकार ने मज़दूरों के खिलाफ देश में जंग छेड़ दी है.  उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि 2015 के बाद से प्रधानमंत्री ने श्रमिक संगठनों से बात भी नहीं की है. हमने तय किया है कि 10 केंद्रीय श्रमिक संगठन  जुलाई के पहले हफ्ते में देशव्यापी आंदोलन करेंगे. कुल  मिलाकर अब ये तय है कि कोरोना संकट और लॉकडाऊन की वजह से गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की जद्दोजहद में जुटी सरकार को अब एक और मोर्चे पर घिरती नज़र आ रही है. 


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