Supreme Courts hearing on Doctors and other health care staff salary issue – सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोरोना वॉरियर्स डॉक्टरों व स्‍टॉफ को सैलेरी न मिलने जैसी घटनाएं दोबारा नहीं हों

112 Views
Jun 17, 2020
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'कोरोना वॉरियर्स डॉक्टरों व स्‍टॉफ को सैलेरी न मिलने जैसी घटनाएं दोबारा नहीं हों'

नई दिल्ली:

Coronavirus Pandemic: कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ ‘जंग’ लड़ रहे डॉक्टरों व चिकित्साकर्मियों को बेहतर सुविधाएं देने की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या हाईकोर्ट इस मामले की निगरानी नहीं कर सकते? सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद और दिल्ली की मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि डॉक्टरों को तनख्वाह नहीं मिलने की बात सामने आई थी. ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए.कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया है कि डॉक्टरों का वेतन काटा नहीं जाएगा और चीफ सेकेट्री ये सुनिश्चित करेंगे वरना कड़ी सजा मिलेगी.केंद्र सरकार की ओर से मामले में पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने कहा कि डॉक्टरों को वेतन का भुगतान न करना एक आपराधिक अपराध माना जाएगा और सजा को आकर्षित करेगा।. प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी डॉक्टरों को उनके वेतन का विधिवत भुगतान किया जाए.

यह भी पढ़ें

SG तुषार मेहता ने कहा कि डॉक्टरों को वेतन का भुगतान न करना एक आपराधिक अपराध माना जाएगा और सजा को आकर्षित करेगा. ऐसे में हर राज्य के मुख्य सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी डॉक्टरों को उनके वेतन का विधिवत भुगतान किया जाए. उन्‍होंने कहा कि हम डॉक्टरों  और नर्सों का विशेष ध्यान रख रहे हैं, जहां भी संभव हो, क्वारंटाइन सुविधाएं निकटतम स्थान पर दे रहे हैं. लेकिन प्रयोगशालाओं में पीपीएल की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे सीधे मरीजों  से संपर्क नहीं करते हैं. इस पर 

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या हाईकोर्ट इस मामले की निगरानी नहीं कर सकते? गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डॉक्टरों के मुद्दे पर सुनवाई की थी कुछ रिपोर्ट में यह बातें सामने आई थीं कि उन्हें सैलरी नहीं दी जा रही. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे सैनिकों (डॉक्टरों) को असंतुष्ट नहीं रखा जा सकता. यह भी कहा कि केंद्र सरकार को मेडिकल प्रोफेशनल्स के मुद्दे पर और विचार करना चाहिए. डॉक्टरों के हालात को लेकर आरुषि जैन ने याचिका दायर की थी, इसमें कहा गया था कि कोरोना के इलाज में जुटे डॉक्टर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी के बाद होटलों और गेस्ट हाउस में 7 से 14 दिन के लिए क्वारंटाइन में रह रहे हैं. इस मामले में सिर्फ लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा. कोर्ट के मुताबिक ऐसी खबरें मिली थीं कि तीन महीने से सैलरी न मिलने के कारण डॉक्टरों को हड़ताल पर जाना पड़ा. सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए. इस बात का ध्यान रखें कि इन मसलों को कोर्ट के दखल देने की जरूरत ही न पड़े. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के पास फुल पीपीई किट नहीं है, इसके चलते वे सीधे मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं, लिहाज स्वास्थ्यकर्मियों को क्वारंटाइन होना पड़ता है.


Source by [author_name]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *