Uttar Pradesh traders hit with fixed charge of electricity department pleading with CM Yogi – उत्तर प्रदेश के व्यापारियों पर बिजली विभाग के फिक्स्ड चार्ज की मार, CM योगी से लगा रहे गुहार

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Jun 15, 2020
उत्तर प्रदेश के व्यापारियों पर बिजली विभाग के फिक्स्ड चार्ज की मार, CM योगी से लगा रहे गुहार

व्यापारियों पर बिजली के फिक्स्ड चार्ज की मार

वाराणसी:

लॉकडाउन के बाद तकरीबन ढाई महीने बाद धीरे-धीरे उद्योग धंधे पटरी पर आने शुरू ही हुए थे कि इन्हे बिजली का झटका तेजी से लगा है. क्योंकि पूर्ण लॉकडाउन की वजह से मॉल,सिनेमा हाल और उद्योग पूरी तरह बंद रहे लिहाजा एक भी यूनिट बिजली का बिल नहीं खर्च हुआ बावजूद इसके इन्हे बिल लाखों रुपये काआया है.अब ये व्यापारी समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस सूबे के मुखिया ने लाकडाउन के महीनो का बिजली के बिल के फिक्स्ड चार्ज को न लेने के लिये विधुत विभाग से कहा था. वही विधुत विभाग उनसे कैसे बिल चार्ज कर रहा है. इस चार्ज को लेकर अब ये व्यापारी बिजली विभाग के अधिकारी से लेकर सीएम तक गुहार लगा रहे हैं. 

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वाराणसी शहर के लक्सा इलाके का PDR मॉल लॉकडाउन के बाद खुला लेकिन अभी रौनक नहीं लौटी है. मॉल के मालिक दीपक जैन के चेहरे पर भी हवाइयां उड़ रही हैं.   उनके एक हाथ में बिजली का बिल है तो एक हाथ में सूबे के मुखिया का वो समाचार है जिसमे  बिजली विभाग को ये आदेश दिया गया है कि  लाकडाउन के दरमियान बिजली के बिल में इनसे फिक्स्ड चार्ज नहीं लिया जाएगा लेकिन जब जून महीने में बिल आया तो उसमे मार्च अप्रैल और मई महीना का फिक्स्ड चार्ज लगा हुआ था. जिसने  इनके होश उड़ा दिए हैं. इस मॉल में 2 सिनेमा स्क्रीन के साथ ब्राण्डेड कंपनियों के 6 बड़े शो रूम हैं जिसके लिये  मॉल में 500 किलोवॉट के बिजली का कनेक्शन है. जिसका फिक्स्ड चार्ज एक लाख अस्सी हज़ार रुपये महीना है. बंद के दौरान एक भी बिजली की यूनिट नहीं उठी बावजूद इसके बिल लाखों का आ गया है. 

बिजली विभाग की इस मार से बनारस शहर के सबसे पहले मॉल IP सिगरा पर भी असर पड़ा है. मॉल के मालिक मनीष तलवार अपने मॉल का रिनोवेशन करा रहे थे कि लॉकडाउन के बाद पूरे जोर शोर से मॉल की शुरुआत करेंगे लेकिन मॉल खुलते ही इनके जोश को बिजली के बिल ने ठंडाकर दिया. अब हाथ में बिल लेकर वो समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर जब मॉल की 3 सिनेमा स्क्रीन और दर्जनों दुकाने पूरी तरह बंद थी तो कैसे 50 लाख का बिल आ गया. तफ्तीश करने पर पता चला कि बिजली विभाग ने  लॉकडाउन के महीनो का फिक्स्ड चार्ज तो लिया ही है इसके अलावा वन टाईम जमा होने वाली सिक्यूरिटी भी बढ़ा कर अलग से चार्ज कर ली है. 

सिर्फ बड़े बड़े मॉल और सिनेमा हॉल वालों पर ही बिजली के बिल का कहर नहीं टूटा बल्कि छोटे और मझोले शो रुम पर भी इसका असर पड़ा है. बनारस शहर का डीजी ज़ोन शो रूम है. लॉकडाउन से कुछ महीने पहले ही खुला था. अभी ये ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाया था कि कोरोना की बंदी ने इसे पूरी तरह गिरा दिया और बंदी खुलने के बाद कुछ खड़े होने की उम्मीद थी तो उस पर बिजली के बिल ने बड़ी चोट कर दी.  

बिजली विभाग की इस मार से उद्योग करने वाले बुरी तरह से परेशान हैं. राजेश भाटिया जोकि पैकेजिंग बनाने की एक चलाते हैं. इनकी फैक्ट्री में दर्जन भर मशीन और 12 कर्मचारी हैं जो हर रोज़ कई टन मॉल तैयार करते थे लेकिन लाकडाउन के बाद इनके यहां सिर्फ एक मशीन  चल रही है और कर्मचारी भी दो से तीन ही हैं. लगभग सभी उद्योग का यही हॉल है. अभी उद्योग डिमांड के हिसाब से धीरे-धीरे खड़े होने की कोशिश कर रहे लेकिन इनकी इस कोशिश पर बड़ा झटका बिजली के बिल का लगा है. राजेश स्माल इण्डस्ट्री एसोशिएसन के नेता भी हैं लिहाजा अब उनका एसोसिएसन मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से गुहार भी लगा रहा है. 

इस मुद्दे पर बिजली विभाग के आलाधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं. बताते चलें कि बिजली विभाग का फिक्स्ड चार्ज घरेलू से लेकर कामर्शियल और इण्डस्ट्री तक चार कैटेगरिज में बांटा  गया है. जहां किलोवाट के हिसाब से अलग-अलग चार्ज होते हैं, इसमें 110 रुपये , 450 रुपये , 430 रुपये औरस 300 रुपये हैं. ये फिक्स्ड चार्ज बिजली उपभोग करने और न करने दोनों की दशा में पड़ता है. बिजली विभाग के द्वारा लगाए जा रहे चार्ज को व्यापारी अपने साथ सरकार की वादा खिलाफी मान रही है.  


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